भारत में आयकर (Income Tax) की दरें हमेशा से एक अहम मुद्दा रही हैं, और हर साल इन दरों में होने वाले बदलावों का आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ता है। यही कारण है कि वित्तीय बजट का देश के हर नागरिक के लिए बहुत महत्व है। इससे न सिर्फ टैक्स व्यवस्था में बदलाव होते हैं, बल्कि देश के आर्थिक स्वास्थ्य का भी पता चलता है।

हाल ही में, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय करदाताओं के लिए एक बेहद राहत देने वाली घोषणा की है। उन्होंने कहा कि अब 12 लाख रुपये तक की सालाना आय पर कोई आयकर (Income Tax) नहीं लिया जाएगा। यह बदलाव भारतीय टैक्स प्रणाली को और ज्यादा जनता के अनुकूल बनाने के लिए किया गया है।
Table of Contents
12 लाख तक आय पर आयकर (Income Tax) में छूट: ऐतिहासिक निर्णय
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में ऐलान किया कि 12 लाख रुपये तक की सालाना आय पर अब कोई भी आयकर (Income Tax) नहीं लगेगा। पहले इस सीमा को 7 लाख रुपये तक रखा गया था, और इस बदलाव से लाखों लोगों को टैक्स में राहत मिलने की संभावना है। यह फैसला विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद होगा जो कम या मध्यवर्गीय आय में काम करते हैं। इसके अलावा, इस निर्णय से आयकर (Income Tax) स्लैब को और भी लचीला और जनता के अनुकूल बनाने का प्रयास किया गया है।
इस घोषणा से कई करदाताओं को बड़ी राहत मिल रही है, क्योंकि अब वे अपनी आय को आयकर (Income Tax) के दायरे से बाहर पाएंगे। साथ ही, नई व्यवस्था के तहत, छोटे और मंझले व्यवसायों और नौकरीपेशा लोगों को वित्तीय बोझ से राहत मिलेगी। विशेषकर उन लोगों को, जिनकी वार्षिक आय 12 लाख रुपये तक होती है, अब उन्हें अपनी पूरी आय पर आयकर (Income Tax) का भुगतान करने की चिंता नहीं होगी।
आयकर (Income Tax) स्लैब में बदलाव के साथ मिलेंगे और फायदे
न केवल आयकर (Income Tax) की सीमा बढ़ाई गई है, बल्कि इसके साथ-साथ आयकर (Income Tax) स्लैब में भी कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इन बदलावों के तहत अब आयकर (Income Tax) व्यवस्था को और सरल बनाया जाएगा, ताकि करदाताओं को किसी भी प्रकार की जटिलता का सामना न करना पड़े।
नई व्यवस्था के तहत आयकर (Income Tax) स्लैब इस प्रकार होंगे:
- 4 लाख रुपये तक: 0% आयकर (Income Tax)
- 4 लाख रुपये से 8 लाख रुपये तक: 5% आयकर (Income Tax)
- 8 लाख रुपये से 12 लाख रुपये तक: 10% आयकर (Income Tax)
- 12 लाख रुपये से 16 लाख रुपये तक: 15% आयकर (Income Tax)
- 16 लाख रुपये से 20 लाख रुपये तक: 20% आयकर (Income Tax)
- 20 लाख रुपये से 24 लाख रुपये तक: 25% आयकर (Income Tax)
- 24 लाख रुपये से ऊपर: 30% आयकर (Income Tax)
इस स्लैब प्रणाली से आयकर (Income Tax) के भार को लेकर मध्यम वर्ग के लोगों को विशेष राहत मिलेगी। जिनकी आय 12 लाख रुपये तक है, उनके लिए यह बदलाव एक वरदान साबित होगा क्योंकि उन्हें अब अपनी पूरी आय पर आयकर (Income Tax) नहीं देना होगा। इसके अलावा, जिनकी आय 24 लाख रुपये तक होती है, उनके लिए आयकर (Income Tax) बचत की अच्छी संभावना है।
सरकार का लक्ष्य: आयकर (इनकम टैक्स) प्रणाली को सरल और पारदर्शी बनाना
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य देश की आयकर (इनकम टैक्स) प्रणाली को सरल और पारदर्शी बनाना है, ताकि करदाता अपने आयकर (Income Tax) की सही जानकारी प्राप्त कर सकें और उन्हें कोई भ्रम या जटिलता का सामना न करना पड़े। इसके तहत, एकल आयकर (इनकम टैक्स) स्लैब प्रणाली को बढ़ावा दिया जाएगा और आयकर (Income Tax) रिटर्न भरने की प्रक्रिया को भी और अधिक सहज बनाने के प्रयास किए जाएंगे।
नई व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि देश के हर नागरिक को आयकर (Income Tax) देने में सुविधा हो और उन्हें अधिक से अधिक राहत मिले। विशेषकर उन लोगों के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण है, जो नियमित रूप से आयकर (इनकम टैक्स) का भुगतान करते हैं और जिनकी आय सीमित है। यह व्यवस्था छोटे व्यवसायों और कर्मचारियों के लिए भी अधिक अनुकूल है, जो अपनी आय के एक हिस्से को आयकर (Income Tax) में चुकाते हैं।
विषय | मुख्य घोषणाएँ |
---|---|
बिजली क्षेत्र सुधार | बिजली वितरण और ट्रांसमिशन को मजबूत करने के लिए बड़े सुधारों की घोषणा |
शहरी विकास | ₹1 लाख करोड़ का “अर्बन चैलेंज फंड” शुरू, शहरों के पुनर्विकास और जल-स्वच्छता सुधार के लिए |
कैंसर देखभाल सुविधाएं | बिहार समेत देशभर में जिला अस्पतालों में अगले तीन वर्षों में 200 डेकेयर कैंसर सेंटर खोले जाएंगे |
चिकित्सा शिक्षा विस्तार | पिछले दशक में 1.1 लाख नए मेडिकल सीटें जोड़ी गईं, 130% की वृद्धि |
PM गति शक्ति और पर्यटन | निजी क्षेत्र को बुनियादी ढांचे की योजना में मदद के लिए डेटा और मैप्स की सुविधा |
फुटवियर और लेदर सेक्टर | उत्पादकता, गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए नई नीतियां लागू |
निवेश: विकास का तीसरा इंजन | सशक्त आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 योजना के तहत 8 करोड़ बच्चों को समर्थन |
IIT इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार | 5 IITs में बुनियादी ढांचे का विस्तार |
भाषा और शिक्षा | “भारतीय भाषा पुस्तक योजना” शुरू, मातृभाषा में शिक्षा को बढ़ावा |
खाद्य प्रसंस्करण संस्थान | बिहार में नया खाद्य प्रसंस्करण संस्थान स्थापित होगा |
मेक इन इंडिया मिशन | “नेशनल मैन्युफैक्चरिंग मिशन” के तहत उद्योगों को बढ़ावा |
महिलाओं के लिए नई योजना | 5 लाख महिलाओं और नए उद्यमियों को टर्म लोन की सुविधा |
स्टार्टअप्स के लिए क्रेडिट गारंटी | सीमा बढ़ाकर ₹20 करोड़ की गई |
असम में नया यूरिया संयंत्र | नामरूप, असम में 12.7 लाख मीट्रिक टन वार्षिक उत्पादन क्षमता वाला यूरिया संयंत्र स्थापित होगा |
किसान क्रेडिट कार्ड योजना | 7.7 करोड़ किसानों, मछुआरों और डेयरी किसानों को अल्पकालिक ऋण |
कृषि सुधार योजनाएं | “धन-धान्य कृषि योजना” के तहत 100 जिलों में कृषि उत्पादकता बढ़ाने पर जोर, 1.7 करोड़ किसानों को लाभ |

आयकर (इनकम टैक्स) में छूट का प्रभाव
वर्तमान वित्तीय वर्ष में, 12 लाख रुपये तक की आय पर आयकर (इनकम टैक्स) छूट के फैसले से करदाताओं के हाथ में अतिरिक्त पैसा आएगा, जिससे वे अपने जीवनस्तर में सुधार कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, एक व्यक्ति जिसकी सालाना आय 10 लाख रुपये है, उसे अब 5% आयकर (इनकम टैक्स) का भुगतान करना होगा, जबकि पहले उसे 20% आयकर (Income Tax) भरना पड़ता था। यह बदलाव सीधे तौर पर उनके लिए राहतकारी साबित होगा।
इसके अलावा, नई व्यवस्था के तहत, आयकर (Income Tax) की दरों में बदलाव से आयकर (Income Tax) के लिए अनिवार्य दस्तावेजों की संख्या भी घटाई जाएगी। इससे करदाताओं को यह प्रक्रिया और अधिक आसान और तेजी से पूरी करने में मदद मिलेगी।
आयकर (इनकम टैक्स) दरों में बदलाव का ऐतिहासिक संदर्भ
भारत में आयकर (Income Tax) दरों में बदलाव का लंबा इतिहास रहा है। इस संबंध में कुछ प्रमुख बदलाव इस प्रकार रहे हैं:
- 1997-98: इस वर्ष, आयकर (इनकम टैक्स) दरों में पहली बड़ी वृद्धि देखी गई थी। 5 लाख रुपये से ऊपर की आय पर 40% आयकर (इनकम टैक्स) लागू किया गया था।
- 2009-10: सरकार ने व्यक्तिगत आयकर (Income Tax) पर अधिभार समाप्त किया। इसके बावजूद 10 लाख रुपये से ऊपर की आय पर 10% अधिभार लागू किया गया।
- 2014-15: मोदी सरकार ने नई आयकर (इनकम टैक्स) व्यवस्था पेश की, जिसमें आय स्लैब में कुछ बदलाव किए गए थे और करदाताओं को राहत दी गई थी।
- 2018-19: सरकार ने स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर को बढ़ाया, और आयकर (इनकम टैक्स) स्लैब में भी कुछ बदलाव किए।
- 2020-21: कोविड-19 महामारी के कारण सरकार ने आयकर (इनकम टैक्स) दरों में राहत दी और आयकर (Income Tax) छूट की सीमाओं को बढ़ाया।
- 2021-22: सरकार ने स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से आयकर (इनकम टैक्स) दरों में कुछ बदलाव किए।

विशेष वर्ग के लिए आयकर (इनकम टैक्स) में और राहत
नई व्यवस्था के तहत, विशेष वर्गों जैसे कि महिलाएं और बुजुर्गों के लिए भी आयकर (इनकम टैक्स) में छूट का ऐलान किया गया है। महिलाओं के लिए स्वास्थ्य बीमा पर अधिक छूट और बुजुर्गों के लिए बैंक डिपॉजिट पर उच्च ब्याज छूट की घोषणा की गई है, जिससे उनकी आय पर आयकर (इनकम टैक्स) कम होगा। यह कदम सरकार की ओर से बुजुर्गों और महिलाओं की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम है।
निष्कर्ष
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा की गई यह घोषणा एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकती है, क्योंकि इससे न केवल आम नागरिकों को राहत मिलेगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी इससे लाभ होगा। आयकर (Income Tax) की दरों में बदलाव से हर वर्ग के लोग लाभान्वित होंगे और उन्हें आयकर (Income Tax) की जटिलताओं से निजात मिलेगी। यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि सरकार का आयकर (Income Tax) प्रणाली आम आदमी की जरूरतों को समझते हुए आगे बढ़े।
- Murder And Minister’s Dhananjay Munde Resignation: कैसे बीड में एक सरपंच की हत्या ने धनंजय मुंडे को संकट में डाल दिया?
- Mexico To Go Ahead US Markets Crash: डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा पर 25% टैरिफ की पुष्टि की, डॉव जोन्स 650 अंकों तक गिरा; टिम कुक ने नए एप्पल प्रोडक्ट का संकेत दिया।
- Himani Narwal Murder Case: हरियाणा कांग्रेस कार्यकर्ता की हत्या के मामले में 1 आरोपी गिरफ्तार।
- ‘No fuel to 15-year-old vehicles’: दिल्ली सरकार ने प्रदूषण विरोधी उपायों की घोषणा की
- Pune Bus Rape Accused Called Survivor ‘Didi’: पानी मांगने की वजह से कैसे हुई उसकी गिरफ्तारी
कितने लाख तक इनकम टैक्स फ्री है?
वर्तमान में, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित नई व्यवस्था के तहत, 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई भी आयकर (Income Tax) नहीं लगेगा। पहले यह सीमा 7 लाख रुपये तक थी, लेकिन अब यह सीमा बढ़ा दी गई है, जिससे लाखों भारतीय नागरिकों को राहत मिलेगी।
क्या नई कर व्यवस्था में 50000 मानक कटौती है?
नई कर व्यवस्था में मानक कटौती का प्रावधान नहीं है, लेकिन कुछ अन्य छूट और कटौतियाँ जैसे कि HRA (House Rent Allowance) और 80C के तहत निवेश की छूट दी जाती है।
न्यू टैक्स स्लैब में क्या-क्या छूट है?
नई टैक्स स्लैब में 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं है। इसके अलावा, 4 लाख रुपये से 12 लाख रुपये तक की आय पर 5%, 10%, 15%, 20%, 25% और 30% की टैक्स दरें लागू हैं। इसके अलावा, करदाताओं को मेडिकल और जीवन बीमा जैसी कुछ अतिरिक्त छूट भी मिल सकती है।
अगर मेरी सैलरी 10 लाख है तो मैं कितना टैक्स दूंगा?
यदि आपकी सैलरी 10 लाख रुपये है, तो आपको नई टैक्स स्लैब के तहत लगभग 1,00,000 रुपये तक का आयकर (Income Tax) चुकाना होगा। इसमें विभिन्न कटौतियाँ और छूट भी लागू हो सकती हैं।
7 लाख तक की इनकम टैक्स फ्री कैसे होती है?
7 लाख रुपये तक की आय पर टैक्स फ्री होने का कारण यह है कि सरकार ने इस सीमा को आयकर छूट की सीमा के तहत रखा है। इसे मुख्य रूप से छोटे और मध्यवर्गीय वर्ग के लोगों को राहत देने के लिए लागू किया गया है।
9 लाख पर कितना इनकम टैक्स लगेगा?
9 लाख रुपये की आय पर टैक्स की दर 10% होगी, जो लगभग 90,000 रुपये बनती है, हालांकि इसमें किसी अन्य कटौती या छूट का भी असर हो सकता है।
वित्त वर्ष 2024-2025 के लिए आयकर परिवर्तन है?
वित्त वर्ष 2024-2025 के लिए आयकर दरों में कुछ बदलाव किए गए हैं, जिसमें 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगाया गया है। इसके अलावा, टैक्स स्लैब में कुछ लचीलापन और कटौतियाँ भी बढ़ाई गई हैं।
बैंक में कितने पैसे पर टैक्स लगता है?
बैंक में जमा राशि पर टैक्स तब लागू होता है जब आपकी ब्याज आय एक निश्चित सीमा से अधिक हो जाती है। 40,000 रुपये (60 वर्ष से ऊपर के व्यक्तियों के लिए 50,000 रुपये) तक ब्याज पर टैक्स नहीं लगता है, लेकिन इसके बाद आपको आयकर (Income Tax) चुकाना पड़ता है।
सेविंग अकाउंट में 1 साल में कितना पैसा रख सकते हैं?
सेविंग अकाउंट में पैसे रखने पर कोई सीमा नहीं होती है, लेकिन यदि आपका बैलेंस बहुत अधिक है, तो बैंक आपको इसके स्रोत के बारे में पूछ सकता है।
बैंक खाते में कितना नकद लेनदेन की अनुमति है?
एक बैंक खाते में नकद जमा और निकासी की सीमा बैंक के नियमों पर निर्भर करती है, लेकिन आमतौर पर 10 लाख रुपये से अधिक की नकद लेनदेन पर आपको आयकर विभाग को सूचित करना होता है।
अगर मैं अपने खाते में 20 लाख जमा करूं तो क्या होगा?
यदि आप एक बार में 20 लाख रुपये बैंक में जमा करते हैं, तो बैंक आयकर विभाग को इसकी सूचना दे सकता है, खासकर यदि यह नकद जमा है। यह कदम मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने के लिए है।
सेविंग अकाउंट में 1 दिन में कितना लेनदेन कर सकते हैं?
सेविंग अकाउंट में 1 दिन में लेनदेन की सीमा बैंक की नीतियों पर निर्भर करती है, लेकिन आमतौर पर 2 लाख रुपये तक का लेनदेन बिना किसी परेशानी के किया जा सकता है।
क्या कोई मेरे सेविंग अकाउंट में 2 लाख ट्रांसफर कर सकता है?
हां, कोई भी व्यक्ति आपके सेविंग अकाउंट में 2 लाख रुपये ट्रांसफर कर सकता है, बशर्ते वह नियमों के तहत हो और ट्रांसफर की प्रक्रिया सही तरीके से की जाए।
क्या मैं अपनी पत्नी के खाते में 10 लाख ट्रांसफर कर सकता हूं?
जी हां, आप अपनी पत्नी के खाते में 10 लाख रुपये ट्रांसफर कर सकते हैं। हालांकि, यदि यह राशि बड़ी है, तो ट्रांसफर के स्रोत के बारे में सवाल किए जा सकते हैं।
क्या मैं बैंक से 50 लाख निकाल सकता हूं?
जी हां, आप बैंक से 50 लाख रुपये निकाल सकते हैं, लेकिन इसके लिए आपको बैंक से उचित कागजी कार्रवाई करनी होगी और अधिक राशि निकालने पर बैंक आयकर विभाग को सूचित कर सकता है।
एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में कितनी राशि ट्रांसफर की जा सकती है?
एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में राशि ट्रांसफर करने की कोई सीमा नहीं है, बशर्ते वह निर्धारित नियमों के तहत हो।
एक मोबाइल नंबर को कितने बैंक अकाउंट में जोड़ा जा सकता है?
एक मोबाइल नंबर को कई बैंक खातों से जोड़ा जा सकता है। हालांकि, प्रत्येक बैंक अपने नियमों के अनुसार इस सुविधा को लागू करता है।
क्या बिना चेक के RTGS किया जा सकता है?
हां, बिना चेक के भी RTGS (Real Time Gross Settlement) किया जा सकता है, बशर्ते आपके पास बैंक में पर्याप्त बैलेंस हो और आप इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से लेनदेन कर रहे हों।
प्रति माह UPI लेनदेन की सीमा क्या है?
UPI के माध्यम से प्रति माह लेनदेन की सीमा 1 लाख रुपये तक होती है, हालांकि यह बैंक के नियमों पर निर्भर करता है।
2025 के लिए नया टैक्स स्लैब क्या है?
2025 के लिए आयकर स्लैब में 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं होगा, और इसके ऊपर 5% से लेकर 30% तक टैक्स लगेगा।
इस तरह, आयकर (Income Tax) और बैंकिंग से संबंधित नई नियमों और स्लैब के बारे में जागरूक रहकर आप अपने वित्तीय फैसलों में सही कदम उठा सकते हैं।