राहुल गांधी ने हाल ही में सीईसी (मुख्य चुनाव आयुक्त) की नियुक्ति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के निर्णय पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे “मध्यरात्रि में लिया गया निर्णय” बताते हुए कहा कि यह लोकतंत्र और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता के खिलाफ है। उनका कहना था कि जब यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, तब इस फैसले का पारित किया जाना सरकार के अवमाननापूर्ण रवैये को दर्शाता है।
राहुल गांधी का आरोप: सीईसी नियुक्ति प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना
राहुल गांधी ने यह आरोप लगाया कि सीईसी नियुक्ति प्रक्रिया में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना की है। उन्होंने याद दिलाया कि मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए एक समिति बनाई जाए, जिसमें प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और मुख्य न्यायाधीश शामिल हों। इसके बावजूद सरकार ने इस आदेश को अनदेखा करते हुए एक नया विधेयक पास किया, जो इस प्रक्रिया में मुख्य न्यायाधीश को हटा देता है।
कांग्रेस ने सीईसी नियुक्ति के फैसले को गलत बताया, सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
कांग्रेस ने सीईसी नियुक्ति के फैसले को गलत बताते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। राहुल गांधी ने कहा कि यह फैसला लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करता है और यह भारत के मतदाताओं के विश्वास को चोट पहुँचाता है। सुप्रीम कोर्ट 19 फरवरी 2025 को इस मामले की सुनवाई करेगा, जिसके बाद इस निर्णय पर कानून का मार्गदर्शन मिलेगा।
राहुल गांधी का विरोध नोट: चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को खतरा

राहुल गांधी ने अपने विरोध नोट में लिखा कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता भारतीय लोकतंत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उनका कहना था कि सरकार का यह कदम निर्वाचन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जब चुनाव आयोग का चयन एक स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रक्रिया से नहीं होगा, तो लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर प्रश्न चिह्न लगेगा।
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में सीईसी नियुक्ति पर कांग्रेस की कड़ी प्रतिक्रिया
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सीईसी नियुक्ति के फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह सरकार का एकतरफा निर्णय था और इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की अवहेलना माना गया। उनके अनुसार, जब सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर सुनवाई कर रहा था, तो इसे बिना किसी कानूनी मार्गदर्शन के आगे बढ़ाना गलत था।
चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट से सवाल, राहुल गांधी ने उठाए गंभीर मुद्दे
राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए पिटीशन को उद्धृत करते हुए इस मामले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल चुनाव आयोग की नियुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे लोकतंत्र की पूरी संरचना पर असर पड़ेगा। गांधी ने यह भी कहा कि सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करना चाहिए और इसके फैसले का इंतजार करना चाहिए।
मोदी सरकार का निर्णय लोकतंत्र की नींव को हिला सकता है: राहुल गांधी
राहुल गांधी ने कहा कि मोदी सरकार का निर्णय लोकतंत्र की नींव को हिला सकता है। उनका कहना था कि जब चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर हमला होगा, तो यह सीधे तौर पर लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों को प्रभावित करेगा। गांधी ने यह भी कहा कि यह कदम चुनाव आयोग और मतदाताओं के अधिकारों पर भी चोट कर सकता है।
राहुल गांधी का दावा: सरकार ने सीईसी नियुक्ति में मुख्य न्यायाधीश को किया बाहर
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने सीईसी नियुक्ति प्रक्रिया में मुख्य न्यायाधीश को हटा दिया है, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यह कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है और इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं के खिलाफ माना जा सकता है। गांधी ने कहा कि यह कदम चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को प्रभावित करने का प्रयास है।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले मोदी सरकार की सीईसी नियुक्ति पर सवाल
राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले मोदी सरकार द्वारा सीईसी नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है, तो सरकार को इसे आगे बढ़ाने से पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करना चाहिए। उनका कहना था कि इससे लोकतंत्र की स्वतंत्रता और सत्ता का संतुलन प्रभावित हो सकता है।
राहुल गांधी ने सरकार से अपील की: सीईसी नियुक्ति प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करें
राहुल गांधी ने सरकार से अपील की कि सीईसी नियुक्ति की प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार किया जाए। उनका कहना था कि जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस मामले पर विचार कर रहा है, तो सरकार को इस फैसले को लागू करने से पहले अदालत के आदेश का पालन करना चाहिए। गांधी ने यह भी कहा कि यह कदम लोकतंत्र और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष:
राहुल गांधी का यह आरोप केवल एक नियुक्ति से संबंधित नहीं है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र की स्वतंत्रता और पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। उनके अनुसार, जब मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हो, तो सरकार का यह निर्णय लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर प्रश्न चिह्न लगा सकता है। यह समय है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का पालन करे और इस निर्णय के बारे में सभी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाए।